देव-सम्राट के अक्खड़ बेटे अलारिक को शक्ति के अंधाधुंध दुरुपयोग के कारण देव लोक से निकाल दिया जाता है। उसकी दिव्यता छीनकर उस पर एक सुनहरी छाप लगा दी जाती है और वह निर्वासन नगर की गंदी सड़कों पर आ गिरता है, जो अंदर से सड़ रही एक अराजक बस्ती है। वहां उसकी मुलाकात चार फटेहाल अनाथ बच्चों से होती है: गुस्सैल वॉली, किताबी फिन, शांत पर्सी और डरपोक डेज़ी। उसकी छाप से रहस्यमय तरीके से जुड़े ये बच्चे उसका साथ छोड़ने से इंकार कर देते हैं। लेकिन ये बच्चे कोई आम लावारिस नहीं हैं, वे ऐसे जीवित पात्र हैं जिन्हें प्रलय के चार घुड़सवार बनना है: युद्ध, अकाल, महामारी और मृत्यु। शहर के नीचे क्षय का स्वामी का एक अंश जाग उठता है, जिसे भ्रष्ट शासक वाया नागरिकों को जीवित चारे के रूप में इस्तेमाल करके पोषित कर रहा है। काली सड़न फैलने के साथ ही अलारिक को एहसास होता है कि रग्नारोक आ रहा है। उसे अपनी खोई हुई शक्ति वापस पानी होगी, या फिर एक नई शक्ति बनानी होगी जो दैवीय अधिकार से नहीं, बल्कि उन चार बच्चों के साथ उसके जुड़ाव से पैदा हो, जिन्होंने एक पतित देवता पर भरोसा करने की हिम्मत की।
देव-सम्राट का बेटा और प्रलय के चार शैतान में अलारिक का पतन कोई सजा नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक परीक्षा है। देवलोक से निकाले जाने के बाद वह निर्वासन नगर की गंदी सड़कों पर एक असहाय मानव के रूप में गिरता है — लेकिन उसकी सुनहरी छाप उसे नहीं घायल करती, बल्कि उसके भविष्य के लिए एक द्वार खोलती है।
वॉली, फिन, पर्सी और डेज़ी केवल अनाथ नहीं हैं — वे प्रलय के चार घुड़सवारों के अवतार हैं। उनका अलारिक के साथ अटूट जुड़ाव उसकी दिव्यता के पुनर्निर्माण का मूल आधार बन जाता है। इन बच्चों के माध्यम से अलारिक शक्ति को ‘अधिकार’ से नहीं, बल्कि ‘ज़िम्मेदारी’ और ‘स्नेह’ से समझना सीखता है।
क्षय के स्वामी का उदय और वाया का भ्रष्ट शासन अलारिक को यह समझने पर मजबूर करते हैं कि असली युद्ध बाहर नहीं, बल्कि उसके भीतर है। देव-सम्राट का बेटा और प्रलय के चार शैतान में अंतिम विजय शक्ति के प्रदर्शन नहीं, बल्कि विश्वास के पुनर्निर्माण पर निर्भर करती है। अब वह देवता नहीं, बल्कि एक संरक्षक बन जाता है — जो चार बच्चों के साथ नए युग की नींव रखता है।
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